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| सांकेतिक एवं व्यंग्यात्मक चित्रण (Satirical Illustration) |
छोड़ो कल की बातें कल की बात पुरानी!
अच्छा तो ठीक।
प्रजातंत्र खतरे में है इसे अब छोड़ ही देते हैं।
नए दौर में लिखेंगे मिलकर नई कहानी
हम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी!
ऐं ! ऐसा है ? चलो फिर लिखते हैं।
तो भाइयों नई कहानी ये है कि न्यू इंडिया में बड़े आराम से सालों से चल रहा Electoral Autocracy* खतरे में आ गया है। पर यह खतरा हंसी मजाक में इंस्टाग्राम पर शुरू हुआ Gen Z अभिजीत दीपके के "काक्रोच जनता पार्टी" नामक राजनीतिक व्यंग , उत्पन्न कर देगा इसकी किसी ने कल्पना ना की थी। इस पार्टी ने डेमोक्रेसी का टोपी पहन चल रही Autocracy को न केवल बे-टोपी कर दिया है बल्कि उसकी पतलून भी ढीली कर दी है।
अपने निर्भीक और अदम्य साहस से "NDA में इस्तीफे नहीं होते " और "फलाना है तो मुमकिन है" जैसे दंभ को चीफ जस्टिस सूर्यकांत के कथित तिलचट्टों ( युवाओं) और परजीवियों ( बेरोजगारों) ने अपने अहिंसक आंदोलन और जंतर मंतर में धरना दे छूमंतर कर दिया है।
सत्ता के डर का खात्मा
किसी भी Autocracy का आधार होता है जनता में सत्ता का डर और Autocrat की सर्वशक्तिमान वाली छवि। इन दोनों प्रतिमानों को युवाओं के इस आंदोलन ने ध्वस्त और तार तार दिया है। न केवल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे हुए बल्कि कथित सर्वशक्तिमान को झुकाने का नामुमकिन सा काम भी मुमकिन हुआ।
युवाओं में व्याप्त असंतोष
असल में देखें तो यह आंदोलन सिर्फ NEET पेपर लीक की किसी एक घटना की प्रतिक्रिया नहीं थी, बल्कि वर्षों से जमा युवा आक्रोश का विस्फोट था। NEET, CUET, CBSE के लगातार पेपर लीक और बेरोजगारी से युवाओं में भयंकर रूप से निराशा व्याप्त थी ही साथ ही भारत की न्यायपालिका विशेष रूप से सुप्रीम कोर्ट के अजीबोगरीब टिप्पणी और फैसले, बिकी हुई मीडिया, दलबदलुओं के तमाशे ,भ्रष्ट चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे भी युवाओं को परेशान कर रहे थे।
सही मायने में काक्रोच जनता पार्टी का सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उसने शासन तंत्र के लगभग हर स्तंभ से सवाल पूछने की वो हिम्मत जनता में पुनः पैदा कर दी है जो पिछले 12 वर्षों में खत्म सा कर दिया गया था। यही कारण है कि पूरे देश में जगह जगह युवाओं के आंदोलन शुरू हो गए हैं। बिहार, बंगाल, कर्नाटक, हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड आदि राज्यों में युवा सड़क पर अपने सवालों के साथ उठ खड़े हुए हैं।
लोकतंत्र में संस्थाएं सम्मान से चलती हैं सम्मान के लिए जरूरी होता है जनता का विश्वास। विश्वास हासिल करने के लिए जनता के सवालों का जवाब देना होता है। प्रेस कॉन्फ्रेंस और संसद से भागने से काम नहीं चलता। इसी तरह डंडा, पेलेट गन और आंसू गैस चलाने से न तो विश्वास पैदा होता है और न ही सम्मान पाया जाता है।
अनुत्तरित सवाल
रहे सवाल वो तो कई हैं ! युवाओं के भविष्य के लिये सरकार की क्या योजनाएं है ? चुनावी वादों का हिसाब कहां है ? युवाओं पर कील लगी लाठी और pallete gun चलाने के शाही फरमान देने वाले महानुभाव कौन हैं? राम मंदिर में चंदा चोरी के सरगना लखनऊ में हैं या दिल्ली में ? सत्ता से सवाल पूछना मीडिया के चलन से बाहर क्यों हो गया है? न्यायपालिका का रवैया , फैसले, और टिप्पणियां जनता का उनमें विश्वास बढ़ाने के बजाय घटा क्यों रहे हैं? इसलिए गाना तो सुनाना ही पड़ेगा, अरे धत्त! जवाब तो देना ही होगा!
क्योंकि लोकतंत्र की ये खूबसूरती है कि जिसे मामूली समझा जाता है वह कभी कभी बड़ा सवाल बन जाता है। ऐसे में CJP ने भारत में लोकतंत्र की अभी भी जीवित होने की ना केवल सूचना दी है बल्कि Autocracy के जाने का बिगुल भी बजा दिया है।
ऐसे में शाबाश कुचू Puchu ! वास्तेगुना Huiya!
जय हिंद!
*स्वीडन स्थित वी-डेम इंस्टीट्यूट (V-Dem Institute - Varieties of Democracy) ने अपनी वैश्विक प्रजातंत्र रिपोर्ट में भारत के लोकतंत्र को 'Electoral Autocracy ' कहा है।
अस्वीकरण : यह लेख लेखक के व्यक्तिगत विचारों और विश्लेषण पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सूचनात्मक और विश्लेषणात्मक है तथा इसमें किया गया व्यंग्य विषय को सरल और रोचक बनाने के लिए है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था, धर्म या राष्ट्र की मानहानि करना नहीं है।

बहुत बढ़िया
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