खंडन - इस लेख में किए गए व्यंग्य, लेख की रोचकता बनाये रखने के लिये ही किया गया । यदि फिर भी किसी दिल को चोट पहुंचती है तो उसके लिये Indianspolitical.com खेद व्यक्त करता है।
28 फरवरी 2026 को शुरू हुए ईरान बनाम इजरायल और अमेरिका युद्ध में भारत की विदेश नीति, ऑपरेशन सिन्दूर की तरह फिर नाकामयाब होती दिख रही है। भारत की नॉन एलाइनमेंट से प्राइम एलाइनमेंट (US-Israel-Gulf) की ओर शिफ्ट करने वाली विदेश नीति ने भारत में तेल और गैस का वैसा संकट (energy crisis) पैदा कर दिया है जो या तो नहीं होता में या कम हो सकता था। सरकार के समर्थक इसे "राष्ट्रीय हित"में classic strategic ambiguity( रणनीतिक अस्पष्टता) कहते हैं वहीं विपक्ष इसे " Betrayal of neutrality" ( तटस्थता से विश्वासघात)मानता है।
इस पूरे मामले को समझने के लिए संपूर्ण घटनाक्रम को देखने की जरूरत है:
भारत के प्रधानमंत्री की युद्ध के समय इजरायल यात्रा
25-26 फरवरी 2026 को भारत के प्रधानमंत्री ने युद्ध छिड़ने से दो दिन पहले इजरायल का दौरा किया । वहां इजरायल के उस प्रधानमंत्री नेतन्याहू से गले मिले जिसे' इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस" ने गाजा का युद्ध अपराधी घोषित किया हुआ था।इस दौरे पर Fatherland और Motherland की तुकबंदी के अलावे उन्होंने Knesset में भाषण देते हुए कह दिया "India stands with Israel, firmly, with full conviction, in this moment and beyond." यह व्यक्तव्य स्पष्ट रूप से गलत समय पर इजरायल को खुलेआम मौन समर्थन देता दिखता है।
खामेनी (Khamenei) की हत्या पर भारत की 'चुप्पी': तटस्थता या पक्षपात?
28 फरवरी 2026 को US-इजरायल ईरान पर आक्रमण कर देते हैं और पहले ही दिन ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनी सहित उनके 40 सहयोगियों की हत्या कर देते है। इस गैर कानूनी काम की भारत सरकार की ओर से ना कोई निंदा की जाती है और ना ही प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री द्वारा कोई श्रद्धांजलि के बोल बोले गए।(केवल विदेश सचिव ने बाद में सीमित संदेश दिया)।
श्रीमती सोनिया गांधी ने इसे तटस्थता नहीं बल्कि "तटस्थता से त्यागपत्र "( "not neutral but abdication") कहा। जबकि
The Diplomat,Bloomberg और,Al jJazeera के news रिपोर्ट
के अनुसार इसने भारत को निश्चित रुप से US-Israel के कैम्प में डाल दिया है।
मीनाब (Minab) में बच्चों की हत्या और मानवीय संवेदनाएं: भारत का रुख और वैश्विक छवि
28 फरवरी को ही ईरान के Minab में US-इजरायल हमले में एक स्कूल पर बमबारी हुई, जिसमें 100+ से 175 बच्चों सहित 168 लोग मारे गए। Amnesty International और Human Rights Watch ने इसे unlawful attack और potential war crime कहा। भारत द्वारा इस पर भी कोई सार्वजनिक निंदा या शोक नहीं जताया गया। निःसंदेह यह भारत के एक स्वतंत्र और नैतिक मापदंड रखने वाले देश की छबि खराब करता है।
IRIS Dena का डूबना: हिंद महासागर में भारत की 'नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर' छवि का क्या हुआ?
ईरानी युद्धपोत IRIS डेना (Frigate Dena) को 4 मार्च 2026 की तड़के, श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास, हिंद महासागर में एक अमेरिकी पनडुब्बी Mk-48 टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबो दिया गया। यह जहाज भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित 17-18 फरवरी 2026 के इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) में भाग लेने के बाद वापस लौट रहा था।
80+ नाविक मारे गए। भारत ने कोई मजबूत प्रतिक्रिया नहीं दी।श्रीलंका वालों ने रेस्क्यू ऑपरेशन कर कईयों की जान बचाई।भारत के प्रधानमंत्री चुप रहे जबकि विदेश मंत्री ने IRIS Dena को "गलत समय पर गलत जगह" कह कर पल्ला झाड़ लिया। इसे भारत सरकार की Selective Silence का हिस्सा माना गया। विपक्ष (राहुल गांधी, खड़गे) ने कहा कि "guest of India" को डुबोया गया, लेकिन भारत के प्रधानमंत्री "mute" रहे। यह Indian Ocean में भारत की "Net security provider" की छवि पर भी सवाल उठाता है।
Dialogue and Diplomacy का समर्थन
भारत ने "dialogue and diplomacy" की बात की, सभी पक्षों से संयम बरतने को कहा, और Gulf में 10 मिलियन भारतीयों की सुरक्षा पर जोर दिया। पर UNSC में ईरान के Gulf हमलों की निंदा को co-sponsor किया, लेकिन US-इजरायल हमलों की निंदा नहीं की। प्रधानमंत्री ने UAE, सऊदी आदि से टेलीफोन से संपर्क बनाए रखा पर ईरान की शुरुआत में उपेक्षा की।
यह पूरी तरह तटस्थता नहीं लगती। चुप्पी selective है — ईरान के खिलाफ बोलना आसान, लेकिन US-इजरायल के खिलाफ बोलना टाला जा रहा है।यह Classic strategic ambiguity से आगे बढ़कर selective silence ही तो है?
अडानी फैक्टर और इजरायल प्रोजेक्ट्स: कॉर्पोरेट हित बनाम राष्ट्रीय हित?
भारत BRICS में ईरान के साथ है, Chabahar पोर्ट चलाता है( यद्यपि अमेरिकी दवाब में वहां भी काम रोक दिया गया ), लेकिन युद्ध में प्रैक्टिकल पक्ष अमेरिका-इजरायल-गल्फ की ओर झुका है — क्योंकि ऊर्जा, रेमिटेंस, और रक्षा के क्षेत्र में देश हित के साथ साथ परम मित्र गौतम अदानी के हित भी
जुड़े हुए हैं।
गौतम अदानी के इजरायल प्रोजेक्ट्स:
- हैफा पोर्ट (70% हिस्सेदारी)
- Adani Elbit JV (Hermes 900 ड्रोन)
- PLR Systems (TAVOR, X95 हथियार)
- Adani-Tower Semiconductor JV (प्लान्ड, पॉज पर)
ये पोर्ट, डिफेंस और टेक क्षेत्रों में हैं। यही कारण है कि विपक्ष ने सरकार की इस विदेश नीति को"चापलूसी" या "कॉर्पोरेट कैप्चर" कहता है।
ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) पर चोट: क्या 'प्रैग्मेटिज्म' से बढ़ा तेल और गैस का संकट?
इजरायल (और अमेरिका) का साथ देने या selective tilt दिखाने से भारत में तेल और गैस का संकट (energy crisis) पैदा हुआ है, फिर भी कांग्रेस के मनीष तिवारी और शशि थरूर द्वारा विदेश नीति की प्रैग्मेटिज्म (व्यावहारिकता) कह कर की गई सराहना आश्चर्यजनक है। जबकि कथित प्रैग्मेटिज्म (US-Israel-Gulf की ओर झुकाव) से लाभ से ज्यादा नुकसान हो रहा है ये अब स्पष्ट दिख रहा है।
प्रैग्मेटिज्म का सही मायने में मतलब होता कि US-Israel-Gulf से मजबूत टाई (रक्षा, निवेश, रेमिटेंस) बनाए रखते हुए ईरान से नजदीकी कायम रखना। लेकिन युद्ध में selective silence ने Gulf सप्लाई को ही रिस्क में डाल दिया। इससे ऊर्जा सुरक्षा (energy security) कमजोर हुई, जो प्रैग्मेटिज्म का मुख्य आधार था।
भारत अब राशनिंग, सब्सिडी बढ़ोतरी, और वैकल्पिक सोर्स (रूस, US, अफ्रीका) ढूंढ रहा है — लेकिन ये महंगे और सीमित हैं। ऐसे में हम कह सकते हैं श्री मनीष तिवारी और श्री शशि थरूर ने या तो समझने में गलती की या फिर अपने नेतृत्व के प्रति कोई खुन्नस निकाला है।
रूस, ईरान और पाकिस्तान: क्या भारत ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में मौके गंवा दिए?
ईरान और रूस जिन देशों से भारत को सस्ते तेल मिल रहा था उन देशों से कथित प्रैग्मेटिज्म वाली नीति ने दूर कर दिया।आज भारत दुनिया में ना इधर का रहा ना उधर का। ईरान घोषणा कर रहा है श्रीलंका को तेल सहित वो सारी चीजें देंगे जो चाहिए। यह सुविधा भारत को भी मिल सकती थी पर हा रे प्रैग्मेटिज्म ! जबकि रूस ने घोषणा की वो पाकिस्तान को सस्ते रेट पर तेल देगा जबकि भारत को यह सुविधा अब नहीं मिलेगी! हाय -हाय रे प्रैग्मेटिज्म!
इतना ही नहीं My dear Friend डोनाल्ड ट्रंप को इस युद्ध को रोकने की जरूरत आन पड़ी तो इसके लिए उसे भारत से अधिक उपयुक्त पाकिस्तान लगा। यहां उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान ने US-इजरायल हमलों (खामेनी हत्या सहित) को "अनुचित और अवैध आक्रमण" कहा और निंदा भी की थी। हमने तो अपना मुंह बंद रखा था फिर भी हम से बेरुखी ? ऐसा क्यों लगता है जिसकी चरण सेवा में पूर्ण समर्पण भाव में हम लीन हैं उसकी गोद में पाकिस्तान बैठा है? अरे धत , प्रैग्मेटिज्म!
इस तरह गुट निरपेक्षता नीति से कमाई गई प्रतिष्ठा और नैतिकता का उच्च मानदंड रखने वाली भारत की छवि खंडित हो गई है। श्री राहुल गांधी ने ये इसे विदेश नीति में घातक Structural change बतलाया है जिसे ठीक करने में वर्षों लगेंगे। यह भी कहा वर्तमान नेतृत्व से यह नहीं हो सकेगा क्योंकि ये तो जो अमेरिका और इजरायल कहेगा, वही करेंगे क्योंकि मामला compromaised का है।
Compromaised का मामला क्या है वो तो मित्र अडानी ही बता सकते हैं या एपिस्टिन फाइल या फिर डॉनल्ड ट्रंप के इस वक्तव्य की छानबीन से ही पता चल सकता है ,"???? is a great man. He loves Trump… I don’t want you to take the word ‘love’ any differently. I don’t want to destroy his political career.”