अयोध्या के राम मंदिर में चंदा और चढ़ावा चोरी की घटना हिन्दू आस्था पर कथित हिंदू धर्म रक्षकों द्वारा किया गया आघात है। यह दुःखद है कि लम्बे संघर्ष के बाद जिस मंदिर का निर्माण कथित ईश्वरीय प्रेरणा से सुप्रीम कोर्ट के गुमनाम लेखक वाले दुर्लभतम फैसले से किया गया, वहां ऐसा निकृष्टतम कृत्य किया गया। आश्चर्य तो इस बात से भी है कि प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त वो ट्रस्ट जिसमें RSS और VHP लोग भरे पड़े थे उसकी निगरानी में लोगों के ट्रस्ट के साथ यह खिलवाड़ किया गया।इससे लोगों को "अयोध्या तो झांकी है , मथुरा काशी बांकि है" इसकी बानगी भी दिख गई और मतलब भी समझ में आ गया।
राम मंदिर में कुल कितने करोड़ की चोरी हुई इसका अंतिम, आधिकारिक आंकड़ा घोषित नहीं हुआ है। इस संबंध में कई तरह के अनुमान हैं ।राज्य सरकार की SIT की शुरुआती जांच में 8 करोड़ रुपये की चोरी की बात की गई। बैंक डाटा आधारित एक अनुमान के अनुसार प्रति दिन 6 से 8 लाख रुपए के हिसाब से 3 साल में 65 से 87 करोड़ रुपए चोरी की गई है। सोशल मीडिया पर चल रही खबर के अनुसार चोरी की राशि 200 से 1400 करोड़ तक की हो सकती है।
45 दिन का CCTV और 70 बार चोरी: गायब फुटेज का रहस्य
सही अनुमान लगाना मुश्किल है कि क्योंकि CCTV की सिर्फ 45 दिनों की फुटेज है जिसमें नोटों की गिनती के समय 70 बार चोरी करने की तस्वीरों के रिकॉर्ड मिले हैं। जबकि मंदिर ट्रस्ट के अपने आंतरिक ऑडिट में CCTV फुटेज को 180 दिनों तक सुरक्षित रखने की सिफारिश की गई थी जो नहीं किया गया। समझ में नहीं आता है CCTV से केंद्रीय चुनाव आयुक्त और राममंदिर ट्रस्ट के महासचिव दोनों को इतनी खुन्नस क्यों है ?
नोट चुरा के लाया हूं, वोट चुरा के लाया हूं
चल बैठें मंदिर के पीछे, चल बैठें कुर्सी के पीछे।
पद, प्रभाव और क्लीन चिट की राजनीति
प्राण प्रतिष्ठा के मुख्य यजमान ने ना जाने कैसे - कैसे लोगों पर ट्रस्ट कर लिया ? कुल 15 में से 11 वोटिंग का अधिकार रखने वाले सदस्यों में 9 का संबंध RSS या VHP से था। उनके द्वारा गठित ट्रस्ट ने पहली बैठक में उन्हें विष्णु अवतार मानने वाले श्री चंपत रॉय को महासचिव चुन लिया। किसी व्यक्ति को विष्णु का अवतार बताना चाटुकारिता हो सकती है, प्रशासनिक योग्यता का प्रमाण नहीं हो सकता।
श्री चंपत राय आरएसएस के पूर्णकालिक प्रचारक और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतर्राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रहे , उन्हें मंदिर के व्यावहारिक प्रबंधन, दान और दैनिक गतिविधियों के सक्रिय चेहरे और जिम्मेदारी वाले महासचिव के पद पर बैठा दिया गया।
कुछ लोगों को लग सकता है कि कहीं श्री चंपत रॉय को विष्णु भक्ति का प्रसाद तो नहीं मिला ? मैं तो नहीं मानता! यदि ये प्रसाद था तो चढ़ावा चोरी में FIR से पहले बनी SIT ने जो उन्हें तकनीक रूप से क्लीन चिट दी है उसे क्या कहेंगे? महाप्रसाद !
ऐसे ही क्लीन चिट मुख्य ट्रस्टी, RSS के अवध प्रांत के प्रांत कार्यवाहक डॉ अनिल मिश्रा को भी दे दी गई। अनिल मिश्रा की प्रशासनिक और cash-counting व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका थी।
श्री चंपत राय और डॉ अनिल मिश्रा दोनों ने अपने अपने पद से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया। इन्होंने इस्तीफा दिया इसलिये इन्हें तकनीकी क्लीन चिट मिली या फिर तकनीकी क्लीन चिट देनी थी इसलिए इस्तीफा दिया ये अनुसंधान का विषय है।
क्योंकि रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2025 में कैश काउंटिंग के लिए 10 लोगों की भर्ती के लिए कि चंपत राय ने उम्मीदवारों को अनिल मिश्रा के पास भेजा, अनिल मिश्रा ने उनका इंटरव्यू लिया और उसके बाद वे काम करने लगे।SIT की जांच में यह बात सामने आई कि कुछ नियुक्तियां सिफारिश के आधार पर outsourcing agency के जरिए हुईं और कुछ मामलों में पुलिस verification भी नहीं हुआ था।
राज्य सरकार की SIT ने कैश गिनने वाले 8 कर्मचारियों पर जिनमें श्री चंपत रॉय का निजी ड्राइवर टीन्नू यादव और अनिल मिश्रा की सिफारिश पर लगा काउंटिंग हेड संजय श्रीवास्तव भी शामिल है पर FIR कर दिया और फिर उन्हें ही मुख्य आरोपी बना कर जेल भेज दिया। इस तरह इनकी सिफारिश करने वाले बड़े नामों को बचा लिया गया।
पुराने खुलासे और सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर नई SIT
महिपाल सिंह, राम जन्मभूमि ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी थे। उन्होंने दावा किया कि 2021 में ही उन्होंने चढ़ावे की गिनती में अनियमितताएँ पकड़ी थीं। उनके अनुसार गड्डियों की संख्या और रिकॉर्ड में अंतर था, एक बार ₹5 लाख अतिरिक्त मिले थे जिसकी शिकायत श्री चंपत रॉय और गोपाल दास से की भी थी। लेकिन जांच करने की बजाय उसे ही गिनती से हटा दिया गया। महिपाल सिंह ने यह भी कहा उस समय की सीसीटीवी फुटेज को भी डिलीट कर दिया गया।
महिपाल के इस खुलासे के बाद SIT के रिपोर्ट के खिलाफ नाराजगी और बढ़ गई।इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पहुंचा, जिसने जांच की निगरानी करते हुए SIT से स्टेटस रिपोर्ट मांगी, SIT में फॉरेंसिक ऑडिटर शामिल करने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद SIT पुनर्गठित की गई है पहले वाली SIT के 3 में से दो सदस्य श्री विजय विश्वास पंत और निल नितिन कुमार की जगह DIG सोमेन वर्मा और SSP गौरव ग्रोवर को शामिल किया गया है। इसके अलावे एक फॉरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल करने को कहा गया है। अब चंपत रॉय और डॉ अनिल मिश्रा की पहली वाली क्लीन चिट बेमानी हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट को उम्मीद है कि नई SIT की जांच चढ़ावा चोरी के इस कांड को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचा देगी।
हा हा भाई वाह ! मजाक की भी कोई सीमा होती है ?
मुझे तो आश्चर्य और दुख होता है कि जिस ट्रस्ट में RSS और VHP के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास, महासचिव चंपत रॉय, कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ,डॉ अनिल मिश्रा और कामेश्वर चौपाल जैसे धुरंधर ट्रस्टी हो, प्रधानमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी रहे श्री नृपेंद्र मिश्र मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष हों और सबसे बड़ी बात जिस ट्रस्ट से श्री ज्ञानेश कुमार जैसे अधिकारी को हटा दिया गया हो वहां चढ़ावा चोरी कैसे हो गई?
मन्ना दा आप ही बतलाइए -
कोई किसी का नहीं
ये झूठे नाते हैं, नातों का क्या
दुनिया वाले तेरे बनकर तेरा ही दिल तोड़ेंगे
देते हैं भगवान को धोखा इंसान को क्या छोड़ेंगे
कसमें, वादे, प्यार, वफ़ा सब
बातें हैं, बातों का क्या
जय हिंद
अस्वीकरण : यह लेख लेखक के व्यक्तिगत विचारों और विश्लेषण पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सूचनात्मक और विश्लेषणात्मक है तथा इसमें किया गया व्यंग्य विषय को सरल और रोचक बनाने के लिए है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था, धर्म या राष्ट्र की मानहानि करना नहीं है।
